Wednesday, February 6, 2019

शहीद औरंगजेब की हत्या के मामले में तीन जवानों से पूछताछ: आर्मी सूत्र

शहीद औरंगजेब की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन जवानों से पूछताछ कर रही है। आर्मी सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों पर संदेह है कि इन्होंने औरंगजेब के बारे में जानकारी शेयर की। 44 राष्ट्रीय राइफल में तैनात औरंगजेब की आतंकियों ने पिछले साल जून में अगवा कर हत्या कर दी थी। उनका गोलियों से छलनी शव पुलवामा में मिला था।

आर्मी के मुताबिक, तीनों जवानों से पूछताछ की जा रही है। शक है कि इन तीनों ने जानबूझ कर या अंजाने में शहीद औरंगजेब के बारे में जानकारी शेयर की थी। सूत्रों ने साफ कर दिया है कि अभी जवानों से सिर्फ पूछताछ चल रही है, इनमें से न किसी को हिरासत में लिया गया, न किसी को गिरफ्तार किया गया। शहीद औरंगजेब की हत्या के मामले में पुलिस जांच कर रही है। सेना इस मामले में पुलिस का हर तरह से सहयोग कर रही है।

ईद पर छुट्टी मनाने घर जा रहे थे औरंगजेब
आतंकियों ने 14 जून को सेना के जवान औरंगजेब को कलमपोरा से अगवा किया गया था। वे अपने गांव ईद मनाने के लिए जा रहे थे। औरंगजेब की हत्या करने के पहले आतंकवादियों ने उनका एक वीडियो भी बनाया था। औरंगजेब 44 राष्ट्रीय राइफल के साथ शोपियां के शादीमर्ग में तैनात थे। औरंगजेब के पिता हनीफ सेना से रिटायर्ड हैं। औरंगजेब का एक भाई भी सेना में है। 2014 में आतंकियों ने औरंगजेब के चाचा को अगवा कर उनकी हत्या कर दी थी।

2017 में टीएलपी के धरना देने के मामले में कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने 2017 में फैजाबाद में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) और अन्य संगठनों के धरने के मामले में फैसला सुनाते हुए यह हिदायत दी। कोर्ट ने इस पर केस स्वत: संज्ञान लिया था।

जस्टिस काजी फाएज इसा और जस्टिस मुशीर आलम की बेंच ने कहा- हम केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि आप घृणा, चरमपंथ और आतंकवाद की वकालत करने वालों पर कानून के हिसाब से नजर रखें।

बेंच ने निर्देश दिए कि सभी सरकारी एजेंसियांं और विभाग, सेना द्वारा संचालित एजेंसियां जैसे आईएसआई कानून के दायरे में रहकर ही काम करें। सेना राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ना ले और ना ही किसी पार्टी, समारोह या नेता का समर्थन करे।

"रक्षा मंत्रालय, थल सेना-वायु सेना-जल सेना' के चीफ सरकार के जरिए उन लोगों के खिलाफ एक्शन लें, जो अपनी शपथ का उल्लंघन करते पाए जाएं।"

दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाले फतवे गैरकानूनी- बेंच
"ऐसे फतवे भी गैरकानूनी करार दिए जाएंगे, जो दूसरों को नुकसान पहुंचाते हों। किसी व्यक्ति द्वारा जारी किया फतवा-फरमान किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता हो, या किसी को ऐसे रास्ते पर भेजता हो तो उन पर पाकिस्तान के कानून, आतंकवाद निरोधक कानून, इलेक्ट्रॉनिक क्राइम एक्ट तहत कार्रवाई की जाए।"

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